Saturday, 14 December 2013


No One Killed Jan-Lokpal


मेरा नाम,मेरी टोपी,मेरा गाँव और मेरा लोकपाल, सब मेरा ...कुछ ऐसा ही नज़रिया है अन्ना जी का...चुनाव के कुछ दिन पहले पांचवा अनशन ,वो भी केवल 5 दिन चला,कुछ एक हज़ार लोग,रालेगन के बाहर ना कोई आवाज़, ना कोई जुलूस और रुलिंग पार्टी से लेकर विपछ, यहाँ तक की मायावती,पवार तक जैसा नेता इसको पास करने के लिए ऐसे उतावले हो रहे है,जैसे लोकपाल नही उनकी सॅलरी बढ़ रही हो..लोकपाल पे जीतने ट्वीट किरण जी ने 3 साल मैं किए होंगे, उतने केवल 3 दिन मैं कर चुकी हैं..और वो सब लोग जो कभी भी अन्ना जी के साथ नही थे, कुछ एक आद लोगो को छोड़ दो तो वो सब रालेगन मैं दिख रहे हैं...एक ऐसे लोकपाल पे अन्ना जी तेय्यार हो चुके हैं जिनमे उनके खुद के वो एक भी पायंट्स नही जो उनको संसद ने लिखे के दिए थे जिसपे खुद मनमोहन सिंघ जे ने साइन किए थे..फिर क्यू वो उस पे राज़ी हो गये..क्यू नही एक बार भी उन लोगो से राय माँगी गयी जो उस समय अपना सब कुछ भूल के अन्ना जी के साथ केवल इस उमीद से लगे थे की अन्ना जी झुकेंगे नही...क्या अपना ईगो इतना बढ़ गया की उन्हे ये सब दिखाई हीं नही पड़ा... ऐसे लोकपाल को लेकर तो दलो में संघर्ष पहेले था और अब है, लड़ाई है " लोकपाल का श्रेय कौन लेगा"...ये बिल जनलोकपाल नही लोकपाल का श्रेय बिल हैं..सब लगे है श्रेय लेने मैं अन्ना,किरण जी, वी के सिंघ,कॉंग्रेस,भाजपा सब..बस देखिएगा सोमवार के बाद सब आपस में लड़ मरेंगे इसी में... ये ठीक वैसा ही महासमर हैं जहाँ पितामह भीष्म मौन और गुरु द्रोण ढुर्योधन के सिँहासन से सहमत हो चुके हैं..कभी कभी सोचकर खीज जाता हूँ, आखिर अरविन्द अन्ना को कुछ क्यूँ नहीं बोलता, पर फिर सोचता हूँ , इसी कारण से तो बाकी दल वाले वाले तिलमिला जाते होंगे...सब लोग अपनी राय का अधिकार रखते हैं मैं किसी पे अपनी राय नही थोपना चाहता पर एक बात बिल्कुल समझ नही आती क्यू कई लोग ऐसे हैं जो अरविंद को मायावती,पवार,मुलायम जैसे सरीखे नेताओ से ज़्यादा ख़तरनाक मानते हैं इतनी शिद्दत से मैने ऐसे लोगो से कभी भी इन नेताओ के बारे मैं इतनी बुरी बाते नही सुनी जितनी की अरविंद के बारे मैं ये करते हैं जैसे आज तक के सारे घोटालो मैं अरविंद का ही हाथ हैं क्यू ऐसा हैं की सब गिद्ध जैसे एकदम डटे  हैं कब मौका मिले और टूट पड़े उस पे...सारे ईमानदारी के प्रमाण पत्र उसी से क्यू माँगे जा रहे हैं क्यू नही कोई बाकी नेताओ से प्रश्न पूछता हैं..क्यू हम हमेशा जो भी व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठाता हैं उसके पीछे पड़ जाते हैं की उसने ऐसी जुर्रत की कैसे?? इतना दबा दो उसे की आगे से कोई ऐसी जुर्रत ना कर पाए..और अरविंद एक ऐसा ढीठ हैं जा खड़ा हैं अकेले बिना झुके, बिना रुके कब तक पता नही..!!!!

Thursday, 5 December 2013

एग्ज़िट पोल




एग्ज़िट पोल

कल से देख रहा हूँ,एग्ज़िट पोल का नाटक चल रहा हैं,हर तरफ 4-0 का ही राग हैं,क्यू भाई चुनाव तो मिज़ोरम में भी थे वो कोई चीन में तो नही हैं.मिजोरम, न मोदी के इंक्लूसिव विकास में आता है और न टीवी के, रैली और एग्जिट पोल, दोनों से गायब है.दिल्ली के 67% मतदान ब्रेकिंगन्यूज़ हैं पर मिज़ोरम के 80% मतदान सकिंग न्यूज़, बस अब एक बार चीन को अरुणाचल के साथ मिज़ोरम का नाम बस लेने दीजिए अगले 10 साल के चुनाव इसी पे हो जाएँगे...मीडिया के लिए तो उत्तर पूर्व के कुछ राज्य तो बोझ जैसे हैं,कब मोका मिले और फेक दें... कुछ दिन पहले आसाम में एक रेप हूआ था. कुछ जानवरो ने आँखे निकाल ली थी पर उस समय तेजपाल बिक रहे थे सो सब बेचने में लगे थे..खेर फिर लौट के एग्ज़िट पोल पे आते हैं, कुछ न्यूज़ वालो का तो हाजमा इतना खराब था की बस 5 बजे नही की सारा का सारा प्रेशर खाली कर दिया....कितनी अजीब हालत हैं वोटिंग भी चल रही थी और एग्ज़िट पोल भी दिखाया जा रहा था...खेर ताज़ा माल हैं अच्छा बिकेगा ज़्यादा बिकेगा बेच लो बाद मैं पता नही खरीदार मिले ना मिले... कभी कभी सोचता हूँ की वो दूरदर्शन ही सही था..न्यूज़ दिखाई जाती थी कम से कम बेची तो नही जाती थी.


Tuesday, 5 November 2013

मंगल यात्रा मंगलमय हो...!!!






 

मंगल यात्रा मंगलमय हो...!!! 


भारत ने मंगल ग्रह पे पहुचने की दिशा में एक सफल शुरूवात की,हेरानी मुझे इस बात पे नही हूई बल्कि हेरानी इस बात पे है की इस मिशन की कुल लागत केवल 450 cr है, किलोमीटर के हिसाब से देखे तो लगभग12 rs/km  यानी  बेंगलुर के टेक्सी  किराए से भी कम, काश इतने सस्ते ईंधन की तकनीकी ISRO यहा के  टेक्सी वालो को भी दे दे.450 cr रुपये भारत मे इतनी कम राशि है की लगभग इतनी ही कीमत से हमने कॉमनवेल्त की ओपनिंग सेरेमनी की थी,इसके दुगने से ज़्यादा तो मायावती ने अंबेडकर पार्क बनाने मे खर्च कर दी थी इसके पाँच गुने से ज़्यादा मोदी पटेल की मूर्ति खर्च करने मैं लगा देंगे. ये राशि इतनी छोटी है की राजा,कलमाडी,मधु कोड़ा,लालू और इनके जैसे कितने ही नेता तो अकेले ही कितने मंगल अभियान चला सकते है..मुझसे पूछा जाए तो मे तो इसरो के सारे साइंटिस्ट्स को वहाँ से हटा के  वित्त मंत्रालय मैं बिठा दू जब वो इतने कम पैसे पे मार्स मिशन को सफल बना सकते है तो कम से कम प्याज के दाम तो कम कर ही लेंगे और वैसे भी मंगल ग्रह पे यान भेजने के लिए हमारे राहुल गाँधी जी कम टॅलेंटेड थोड़े है.मायावती को तो इसरो पे केस कर देना चाहिए आख़िर इसरो ने एक पार्क की लागत से भी कम लागत मे यान भेज के दलित समाज के लिए बनाए गये पार्क की बेज़्जती तो की ही है.साथ ही साथ मोदी को भी हमेशा की तरह इस बार भी टेकसेवी की अपनी इमेज को बचा के रखनी चाहिए. अब जब मोदी का भी PM बनना लगभग तय ही लग रहा है तब मेरे हिसाब से मोदी को थोड़ा वेट करना चाहिए ओर पटेल की मूर्ति सीधे मंगल ग्रह पे बनवानी चाहिए. मोदी ऐसा कर के एक ग्लोबल लीडर भी बन सकते हैं क्या हूआ की अमेरिका ने मोदी को वीसा नही दिया.मोदी ने अमेरिका  से भी बड़ी मूर्ति मंगल पे बनवा दि. कसम से अपनी बेज़्जती का ऐसा बदला तो अमेरिका सोच भी नही सकता.अमेरिका को ऐसा झटका तो लादेन ने भी नही दिया होगा. 

Friday, 1 November 2013

मूर्ति का चक्कर


मूर्ति का चक्कर 


अक्सर हम अपनी राय अपनी सुविधा के अनुसार बनाते है. कॉंग्रेस का हर नेता अपने आप को स्थापित करने के लिए नेहरू गाँधी परिवार को पकड़े रहता हैं वहाँ ये एक सर्वमान्य परंपरा हैं इसलिए कोई भी स्कीम हो उसका नाम हमेशा नेहरू गाँधी के उपेर ही होगा ये तय है. कॉंग्रेस की इस आदत या बीमारी से कई महान नेता छूट गये तो आज कल जिसको भी अपने आप को राजनीति मैं स्थापित करना होता हैं वो अपनी सुविधा अनुसार किसी बचे खुचे महान नेता को पकड़ लेता हैं. मायावती अपने को CM एवं दलित नेता के रूप स्थापित करना चाहती थी,सो अंबेडकर के नाम पे कई सो करोड़ से एक भव्य पार्क बना दिय.मायावती तो दलित नेता बन गयी पर दलितो का उस पार्क से क्या भला हूआ वो या तो दलित जानते होंगे या मायावती. मोदी भी PM एवं अटल जी की तरह एक सर्वमान्य नेता बनना चाहते हैं सो उन्होने पटेल जी को पकड़ लिया. अब वो कई हज़ार करोड़ से विश्व की सबसे उँची प्रतिमा बनवायंगे,क्यूंकी मोदी की जरूरत बड़ी है सो उनका इनवएस्टेमेंट भी बड़ा होगा.मूर्ति भी बन जाएगी,मोदी PM भी बन जाएँगे. जो ग़रीब हैं वो उस मूर्ति के नीचे खड़े होके अपनी पगड़ी संभालते हूए सोचेंगे की शायद हम विश्‍व मैं सबसे उपर हो गये. जो भला अंबेडकर पार्क से दलितो का हूआ हैं वही भला इस मूर्ति से समाज का होगा या शायद मेरी ही बुद्धि छोटी हैं जो समझ में नही आता ये मूर्ति का चक्कर. कुछ भी हो किसी का भला हो ना हो चिड़ियो का भला ज़रूर होगा उन्हे नयी जगह मिलेगी अपनी थकान मिटाने को ओर बीट करने को. 

Thursday, 31 October 2013

ग़रीब की दीवाली






ग़रीब की दीवाली

खाने को तेल बमुश्किल मिलता था घर में,
वो पूरे शहर की रोशनी दिखाता था,
चढ़ के पड़ोस की उँची छत पे अपने बच्चो के साथ,
दूसरो के जलाए हूए रॉकेट दिखाता था,
वो ग़रीब हर साल अपनी दीवाली कुछ ऐसे मनाता था...!!!

छन रही थी बगल के घरो जब पूडिया सबके,
उसके पास खिलाने को बस एक रोटी थी,
राम के लौटने में वो भी उतना ही खुश था,
पर लक्ष्मी को खुश करने को उसकी जेब छोटी थी,
बच्चो को राम की कहानी सुना के सुलाता था,
वो ग़रीब हर साल अपनी दीवाली कुछ ऐसे मनाता था...!!!

बच्चे भी उसके बड़े समझदार थे,
जानते थे की उनके बाप ईमानदार थे,
स्कूल जा के सबको झुटि कहानी सुनाते थे,
राते भर पटाखे फोड़े ऐसा बताते थे,
बाप अगली दीवाली के लिए फिर से पैसा बचाता था,
वो ग़रीब हर साल अपनी दीवाली कुछ ऐसे मनाता था...!!! 

Wednesday, 30 October 2013

अक्सर सोचता हू मे उपर हर धर्म के भगवान केसे रहते होंगे..!!

अक्सर सोचता हू मे हर धर्म के भगवान उपर केसे रहते होंगे,
धरती के इंसानो की तरह क्या  आपस मे झगड़ते होंगे..!!

यहा अपने धर्म को उचा बताने की सब मे होड़ लगी है,इंसान की हालात की किसको पड़ी हे,
ना जाने यहा कितने ही धर्म की रोटिया सेकने वाले ,ना जाने धर्म से कितनो ही की दुनिया उजड़ी पड़ी हे,
चॅड रहे जावारहत यहा पत्थरो पे कितने,दिक्थि  नही की बाहर एक भूखी बुढ़िया खड़ी हैं,
तौल रहे है सब अपने धर्म को यहा पे ,हर धर्म की जमात एक तराजू लिए खड़ी हें,
भगवान भी क्या ऐसा सोचते होंगे ,वो भी को क्या धर्म को तराजुओ में तौलते होंगे 

अक्सर सोचता हू मे हर धर्म के भगवान उपर केसे रहते होंगे,
धरती केइंसानो की तरह क्या  आपस मे झगड़ते होंगे..!!

हर दूसरे दिन रोशनी से मन्दिर/मस्जिद सज जाता है,तभी एक बच्चा बगल की झोपड़ी मे भूक से मर जाता है,
बच्चे की मा को इस बात की खबर नही थी,ग़रीबी से परेशन, एक बाबा को जिस्म बेच रही थी,
 बाबा का शहर में नाम बड़ा था, भोली जनता को भड़काने का उस पे केस चला था ,
उसी शहर मे बाबा का एक दोस्त मौलवी भी था,उसके धरम के लोगो को उस पे विश्वास बड़ा था,
धरम को ख़तरे मे बता के सबको लड़ा रहा था,बाबा के साथ मिल के मौज उड़ा रहा था,
भगवान भी क्या ऐसा सोचते होंगे,सबको लड़ा के क्या सुख भोगते होंगे,

अक्सर सोचता हू मे हर धर्म के भगवान उपर केसे रहते होंगे,
धरती के इंसानो की तरह क्या  आपस मे झगड़ते होंगे..!!

चलो इस बार इन ढोंगियो को धर्म सीखा दें,
दीवाली पे हर ग़रीब के घर एक दीया जला दें,
इस ईद पे ग़रीब को खाना खिला दें,
बहुत बो लिए इन ढोंगियो ने नफ़रत के ये काँटे,चालू प्यार के कुछ फूल उगा दें,
हिंदू मुस्लिम बहुत बन लिए हम अब चलो इंसान बन जाए,इंसानियत को धर्म बना दें,
भगवान भी ऐसा ही सोचते होंगे,इंसानो को लड़ता देख खुद को ही कोसते होंगे.

अक्सर सोचता हू मे हर धर्म के भगवान उपर केसे रहते होंगे,
धरती के इंसानो की तरह क्या  आपस मे झगड़ते होंगे..!!














Thursday, 24 October 2013

सपने



सपने

क्यू अक्सर खामोश तुम हो जाती हो,
वो कौन सी दुनिया है जिसमे खो जाती हो..!!!

आदत है बस तुम्हे चहकते,मुस्कुराते,झुझलाते,चिल्लाते,रोते हूए देखने की,
जनता हू सपने है असीम तुम्हारी आँखो मे,एक अलग संसार है तुम्हारा,
डरता हू इनका टूट जाना कैसा सहोगी तुम, 
मेरा तो बस एक सपना है जिसे मैने देखा था तुम्हारे साथ,
जिसमे बेठी थी तुम मेरे पास हाथ मेरा पकड़े हूए,
बता रही थी कुछ बहुत देर से बहुत ज़ोर ज़ोर से हँस भी रही थी तुम,
याद नही वो बात बस वो चेहरा याद है,खिलखिलाता,हंसता हूआ चेहरा
फिर एक आंशु गिरा था मेरे हाथ पे मैने पूछा तो फिर तुम खामोश हो गयी थी,
शायद फिर कही किसी दुनिया मे खो गयी थी,

क्यू अक्सर खामोश तुम हो जाती हो,
वो कौन सी दुनिया है जिसमे खो जाती हो..!!!

मुझे याद है वो दिन जब हम मिले थे पहली बार,
शर्मा रही थी तुम छुपा रही थी कुछ मुझसे,
कहना चाहती थी बहुत कुछ पर ना जाने क्यू रुक जाती थी तुम किसी डरसे,
फिर बार बार मुझसे मिलने की कोशिशे करती थी ,
मुझे पता था वो कोशिशे किस लिए थी,
याद है मुझे वो दिन जब तुमने अपना वो ख्वाब बताया था,
जिसमे मे था,तुम्हारे साथ तुम्हारे बगल मे चल रहा था,
कंधे पे सिर रख लेती थी तुम जब थक जाती थी,
सोते हूए मुस्करा रही थी आँखे बंद कर के भी तुम,
फिर एकदम से तुम चॉक  उठी थी ,
जैसे कोई ख्वाब टूट गया हू शायद किसी को अपने पास ढूंड रही थी, 
क्यू नही देखा तुमने मुझे मे भी वही पे था,
बगल मे तुम्हारे पास तुम्हे देख रहा था,तुमसे पूँछ रहा था ,
पूछा था कई बार तुमसे मैने क्या हूआ तुम्हे क्यू  ऐसे चॉक गयी हो,
फिर कुछ ना बोलती तुम , मैने पूछा तो फिर तुम खामोश हो गयी थी,
शायद फिर कही किसी दुनिया मे खो गयी थी,

क्यू अक्सर खामोश तुम हो जाती हो,
वो कौन सी दुनिया है जिसमे खो जाती हो..!!!

Saturday, 19 October 2013

भागती दौड़ती ये शहरो की गलिया


भागती दौड़ती ये शहरो की गलिया,गलिया मे बसता है लोगो का मेला,
जाना कहा है कुछ नही है पता,आगे निकालने का है बस रेलाम रेला||

छोटा मे था जब मेरे छोटे थे सपने,छोटी सी दुनिया थी और सब थे अपने,
छोटी सी बतो पे छोटी लड़ाई,लड़ाई के बाद वो रूठना मनाना,
फिर मम्मी का कुछ अच्छा खाना बनाना,खाने की मेजो पे हसना हसाना,
 किचन मे जा के वो बिस्किट चुराना,चुरा के सब से बहाने बनाना.
ये दुनियादारी नही तब थी एसी,छोटे से हम थे और बड़ी थी रहिसी..||

भागती दौड़ती ये शहरो की गलिया,गलिया मे बसता है लोगो का मेला,
जाना कहा है कुछ नही है पता,आगे निकालने का है बस रेलाम रेला||

जब से हम थोड़े से समझदार हो गये है,सारी रहिसी गुम और कंगाल हो गये है,
घर-ऑफीस की भाग दौड़ मे बस पिसे जा रहे है,जीना है इसलिए बस जिए जा रहे है,
सारे सपने फ्लेट,गॅडजेट्स और कारो मे खो गये है,हम खुद से ही कितने दूर हो गये है,
निकले थे घर से तो सपने बड़े थे,अकाउंट मे बस थोड़े पैसे पड़े थे ,
हम पैसे बढ़ाने की ज़िद पे अड़े थे,पलट के देखा तो अकेले खड़े थे.
पता नही कब की थी हँसी और ठिठोली,ज़्यादा खुश हूए तो बस थोड़ी पी ली,
कहे भी तो किससे कौन है काबिल,इन भागती सड़को ने सब की ही ले ली.
सब अपनी उलझनो मे उलझे पड़े है,समझदार होने की सज़ा पा रहे है||

भागती दौड़ती ये शहरो की गलिया,गलिया मे बसता है लोगो का मेला,
जाना कहा है कुछ नही है पता,आगे निकालने का है बस रेलाम रेला||

खबर सारी दुनिया की है पर नही खुद को अपनी खबर है,रोज चलना बिना मंज़िलो के ये कैसा सफ़र है.
$ के रेट की सबको पड़ी है,ब्रॅंडेड कपड़ो की झाड़िया लगी है
इंसान सब कुछ इकट्ठा किए जा रहा है,बस खुद को ही नंगा किए जा रहा है ..
इन सबसे अच्छा था बचपन हमारा,जेबे थी खाली पेर था सबका सहारा,
मुझे मेरे बचपन की याद आ रही है,ये दौड़ती सड़के मुझे खा रही है||

भागती दौड़ती ये शहरो की गलिया,गलिया मे बसता है लोगो का मेला,
जाना कहा है कुछ नही है पता,आगे निकालने का है बस रेलाम रेला||

यू दौड़ दौड़ के मरने से पहले,चलो ऐसा कर ले तोड़ा सा ज़ी ले,
कहा मज़ा है चलने मे अकेले, चलो एक अच्छा सा हम सफ़र तो बना ले,
चलो चल के थोड़ा सा समय अब निकाले,साथ बेठे और जी भर के बाते कर ले,
रोती हे जो माँ याद कर कर के हमको ,चलो उसको एक फोन लगा ले,
भागती दौड़ती इस जिंदगी मे अपनो के लिए कुछ समय तो निकाले..कुछ समय तो निकाले ||