Wednesday, 30 October 2013

अक्सर सोचता हू मे उपर हर धर्म के भगवान केसे रहते होंगे..!!

अक्सर सोचता हू मे हर धर्म के भगवान उपर केसे रहते होंगे,
धरती के इंसानो की तरह क्या  आपस मे झगड़ते होंगे..!!

यहा अपने धर्म को उचा बताने की सब मे होड़ लगी है,इंसान की हालात की किसको पड़ी हे,
ना जाने यहा कितने ही धर्म की रोटिया सेकने वाले ,ना जाने धर्म से कितनो ही की दुनिया उजड़ी पड़ी हे,
चॅड रहे जावारहत यहा पत्थरो पे कितने,दिक्थि  नही की बाहर एक भूखी बुढ़िया खड़ी हैं,
तौल रहे है सब अपने धर्म को यहा पे ,हर धर्म की जमात एक तराजू लिए खड़ी हें,
भगवान भी क्या ऐसा सोचते होंगे ,वो भी को क्या धर्म को तराजुओ में तौलते होंगे 

अक्सर सोचता हू मे हर धर्म के भगवान उपर केसे रहते होंगे,
धरती केइंसानो की तरह क्या  आपस मे झगड़ते होंगे..!!

हर दूसरे दिन रोशनी से मन्दिर/मस्जिद सज जाता है,तभी एक बच्चा बगल की झोपड़ी मे भूक से मर जाता है,
बच्चे की मा को इस बात की खबर नही थी,ग़रीबी से परेशन, एक बाबा को जिस्म बेच रही थी,
 बाबा का शहर में नाम बड़ा था, भोली जनता को भड़काने का उस पे केस चला था ,
उसी शहर मे बाबा का एक दोस्त मौलवी भी था,उसके धरम के लोगो को उस पे विश्वास बड़ा था,
धरम को ख़तरे मे बता के सबको लड़ा रहा था,बाबा के साथ मिल के मौज उड़ा रहा था,
भगवान भी क्या ऐसा सोचते होंगे,सबको लड़ा के क्या सुख भोगते होंगे,

अक्सर सोचता हू मे हर धर्म के भगवान उपर केसे रहते होंगे,
धरती के इंसानो की तरह क्या  आपस मे झगड़ते होंगे..!!

चलो इस बार इन ढोंगियो को धर्म सीखा दें,
दीवाली पे हर ग़रीब के घर एक दीया जला दें,
इस ईद पे ग़रीब को खाना खिला दें,
बहुत बो लिए इन ढोंगियो ने नफ़रत के ये काँटे,चालू प्यार के कुछ फूल उगा दें,
हिंदू मुस्लिम बहुत बन लिए हम अब चलो इंसान बन जाए,इंसानियत को धर्म बना दें,
भगवान भी ऐसा ही सोचते होंगे,इंसानो को लड़ता देख खुद को ही कोसते होंगे.

अक्सर सोचता हू मे हर धर्म के भगवान उपर केसे रहते होंगे,
धरती के इंसानो की तरह क्या  आपस मे झगड़ते होंगे..!!














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