Thursday, 24 October 2013

सपने



सपने

क्यू अक्सर खामोश तुम हो जाती हो,
वो कौन सी दुनिया है जिसमे खो जाती हो..!!!

आदत है बस तुम्हे चहकते,मुस्कुराते,झुझलाते,चिल्लाते,रोते हूए देखने की,
जनता हू सपने है असीम तुम्हारी आँखो मे,एक अलग संसार है तुम्हारा,
डरता हू इनका टूट जाना कैसा सहोगी तुम, 
मेरा तो बस एक सपना है जिसे मैने देखा था तुम्हारे साथ,
जिसमे बेठी थी तुम मेरे पास हाथ मेरा पकड़े हूए,
बता रही थी कुछ बहुत देर से बहुत ज़ोर ज़ोर से हँस भी रही थी तुम,
याद नही वो बात बस वो चेहरा याद है,खिलखिलाता,हंसता हूआ चेहरा
फिर एक आंशु गिरा था मेरे हाथ पे मैने पूछा तो फिर तुम खामोश हो गयी थी,
शायद फिर कही किसी दुनिया मे खो गयी थी,

क्यू अक्सर खामोश तुम हो जाती हो,
वो कौन सी दुनिया है जिसमे खो जाती हो..!!!

मुझे याद है वो दिन जब हम मिले थे पहली बार,
शर्मा रही थी तुम छुपा रही थी कुछ मुझसे,
कहना चाहती थी बहुत कुछ पर ना जाने क्यू रुक जाती थी तुम किसी डरसे,
फिर बार बार मुझसे मिलने की कोशिशे करती थी ,
मुझे पता था वो कोशिशे किस लिए थी,
याद है मुझे वो दिन जब तुमने अपना वो ख्वाब बताया था,
जिसमे मे था,तुम्हारे साथ तुम्हारे बगल मे चल रहा था,
कंधे पे सिर रख लेती थी तुम जब थक जाती थी,
सोते हूए मुस्करा रही थी आँखे बंद कर के भी तुम,
फिर एकदम से तुम चॉक  उठी थी ,
जैसे कोई ख्वाब टूट गया हू शायद किसी को अपने पास ढूंड रही थी, 
क्यू नही देखा तुमने मुझे मे भी वही पे था,
बगल मे तुम्हारे पास तुम्हे देख रहा था,तुमसे पूँछ रहा था ,
पूछा था कई बार तुमसे मैने क्या हूआ तुम्हे क्यू  ऐसे चॉक गयी हो,
फिर कुछ ना बोलती तुम , मैने पूछा तो फिर तुम खामोश हो गयी थी,
शायद फिर कही किसी दुनिया मे खो गयी थी,

क्यू अक्सर खामोश तुम हो जाती हो,
वो कौन सी दुनिया है जिसमे खो जाती हो..!!!

1 comment: