घर के सामने का कूड़ा...!!!
घर के सामने की गली में कुछ कूड़ा जमा हो गया एक दिन,
इस इंतेज़ार में की कौन हाथ गंदे करे
सब बैठे रहे घर में छुप कर,
फिसल कर गिर जाते थे लोग उसपे,
उठकर झाड़ कर कपड़े अपने,
बुदबुदा कर,गरिया कर दबी ज़ुबान में,
रख कर नाक पे रुमाल निकल जाते थे,
पड़ोसी कई बार झगड़ते थे उस कूड़े पे,
यूँ ही दिन,हफ्ते,महीने फिर साल निकले,
गली का कूड़ा यूँ ही सड़ता रहा,कई लोग उस राह निकले,
उस कूड़े की सड़न से सबने अपनी राहें मोड़ ली,
उस गली में डार्विन का सिधान्त सच हो रहा था,
पूरा मोहल्ला कूड़े के साथ जीना सीख रहा था,
फिर एक दिन चमत्कार हो गया,
एक पागल उस कूड़े को सॉफ करने लग गया,
सब निकले अपने बंद घरो से अवाक,एकटक उसे तकने लगे ,
थोड़ी देर मैं वहाँ मेले के आसार थे,
लोग वहाँ पे पागलो की तरह तालिया बजा रहें थे,
उस एक इंसान को भगवान बना रहे थे,
एकाएक लोगो की तादाद बढ़ गयी,
सब अपनी गलियो के हाल बताने लगे.
हर गली का कूड़ा हटाने का दबाव बनाने लगे,
वो इतनी उम्मीदो के बोझ से दब कर,
थक कर,पसीने से लथपथ सड़क पर,
सारी सड़को को साफ करने का हिसाब लगाने लगा,
कुछ लोग तो इस काम में साथ हो लिए,
बाकी दूर खड़े होके उनपे हसने लगे,
आज भी कुछ ऐसा ही हो रहा हैं,
एक वो इंसान हैं जो उस गली को साफ कर रहा हैं,
और समाज का एक बहुत बड़ा तबका उसे देख हंस रहा हैं,
बस हंस रहा हैं...!!





