भागती दौड़ती ये शहरो की गलिया,गलिया मे बसता है लोगो का मेला,
जाना कहा है कुछ नही है पता,आगे निकालने का है बस रेलाम रेला||
छोटा मे था जब मेरे छोटे थे सपने,छोटी सी दुनिया थी और सब थे अपने,
छोटी सी बतो पे छोटी लड़ाई,लड़ाई के बाद वो रूठना मनाना,
फिर मम्मी का कुछ अच्छा खाना बनाना,खाने की मेजो पे हसना हसाना,
किचन मे जा के वो बिस्किट चुराना,चुरा के सब से बहाने बनाना.
ये दुनियादारी नही तब थी एसी,छोटे से हम थे और बड़ी थी रहिसी..||
भागती दौड़ती ये शहरो की गलिया,गलिया मे बसता है लोगो का मेला,
जाना कहा है कुछ नही है पता,आगे निकालने का है बस रेलाम रेला||
जब से हम थोड़े से समझदार हो गये है,सारी रहिसी गुम और कंगाल हो गये है,
घर-ऑफीस की भाग दौड़ मे बस पिसे जा रहे है,जीना है इसलिए बस जिए जा रहे है,
सारे सपने फ्लेट,गॅडजेट्स और कारो मे खो गये है,हम खुद से ही कितने दूर हो गये है,
निकले थे घर से तो सपने बड़े थे,अकाउंट मे बस थोड़े पैसे पड़े थे ,
हम पैसे बढ़ाने की ज़िद पे अड़े थे,पलट के देखा तो अकेले खड़े थे.
पता नही कब की थी हँसी और ठिठोली,ज़्यादा खुश हूए तो बस थोड़ी पी ली,
कहे भी तो किससे कौन है काबिल,इन भागती सड़को ने सब की ही ले ली.
सब अपनी उलझनो मे उलझे पड़े है,समझदार होने की सज़ा पा रहे है||
भागती दौड़ती ये शहरो की गलिया,गलिया मे बसता है लोगो का मेला,
जाना कहा है कुछ नही है पता,आगे निकालने का है बस रेलाम रेला||
खबर सारी दुनिया की है पर नही खुद को अपनी खबर है,रोज चलना बिना मंज़िलो के ये कैसा सफ़र है.
$ के रेट की सबको पड़ी है,ब्रॅंडेड कपड़ो की झाड़िया लगी है
इंसान सब कुछ इकट्ठा किए जा रहा है,बस खुद को ही नंगा किए जा रहा है ..
इन सबसे अच्छा था बचपन हमारा,जेबे थी खाली पेर था सबका सहारा,
मुझे मेरे बचपन की याद आ रही है,ये दौड़ती सड़के मुझे खा रही है||
भागती दौड़ती ये शहरो की गलिया,गलिया मे बसता है लोगो का मेला,
जाना कहा है कुछ नही है पता,आगे निकालने का है बस रेलाम रेला||
यू दौड़ दौड़ के मरने से पहले,चलो ऐसा कर ले तोड़ा सा ज़ी ले,
कहा मज़ा है चलने मे अकेले, चलो एक अच्छा सा हम सफ़र तो बना ले,
चलो चल के थोड़ा सा समय अब निकाले,साथ बेठे और जी भर के बाते कर ले,
रोती हे जो माँ याद कर कर के हमको ,चलो उसको एक फोन लगा ले,
भागती दौड़ती इस जिंदगी मे अपनो के लिए कुछ समय तो निकाले..कुछ समय तो निकाले ||

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